आहार का मानव जीवन में काफी महत्व है ! सबसे पहले तो यह जीवन चक्र का महत्वपूर्ण कड़ी है साथ ही इसका मनुष्य के व्यवहार पर काफी प्रभाव रहता है ! भारत एक विशाल और विविधता में एकता वाला देश है! इसकी ये विविधता अनेक चीजो के साथ- साथ यहाँ के खान –पान के व्यंजनों में भी दिखता है ! प्रायः सभी अंचलो में कुछ न कुछ विशेष खाने का व्यंजन होता है जो वहां के सामाजिकता और संस्कृति से जुड़ा होता है !
यूं तो
कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक दही और पोहा, अलग-अलग खाने के व्यंजन के रूप
में प्रयोग होता आ रहा है और यह काफी
सहजता से उपलब्ध खाद्य सामग्री है ! पर विशेषतः, चूड़ा (पोहा), दही और गुड़ ! यह
मुख्य रूप से बिहार, झारखण्ड एवं उत्तर
प्रदेश के कुछ हिस्सों में उपयोग किया जाता है ! इस व्यंजन का इतिहास काफी समृद्ध
रहा है ! यह यहाँ के लोक संस्कृति और व्यवहार से जुड़ा हुआ है !
पूर्व में इसका प्रयोग काफी व्यापक था !
स्थानीय लोक इसका सेवन दैनिक खान – पान से लेकर विशेष अवसरों पर भी करते थे!
संभवतः यह अपने तरह के कुछ ही व्यंजनो में से एक होगा, जिसका सेवन नाश्ते और भोजन
दोनों के रूप में किया जाता रहा है!
हालांकि, समय के साथ – साथ पश्चिमी खान
–पान का प्रचलन बढ़ा है ! खास तौर पर नए पीढी के युवा और बच्चे अपने लोक आहार और व्यवहार से दूर होते जा रहे है !
अगर हम चूड़ा दही और गुड़ से तैयार व्यंजन
की बात अलग – अलग सन्दर्भ में करे तो पाते है की यह एक संतुलित व्यंजन है !
स्वास्थ्य की दृष्टी से देखने पर भी यह
काफी अच्छा है! यह व्यंजन हाई फाइबर और लो कैलोरी से भरा हुआ है! यह अपने आप में
एक सम्पूर्ण भोजन है जो अधिकांश आवश्यक तत्वो से भरा हुआ है !
आर्थिक दृष्टी से देखने पर भी यह काफी
लाभप्रद है! यथा भारत दूध के उत्पादन में विश्व में प्रथम एवं धान के उत्पादन में
द्वितीय स्थान रखता है!
साथ ही इसे तैयार करने
में भी न तो कोई भारी मशीनरी ना ही कोई खास प्रोसेसिंग होता है ! यहाँ तक की इसके
लिए इंधन की भी कोई खास आवश्यकता नहीं पड़ती है ! इस तरह के व्यंजनों को बढ़ावा देने
से स्थानीय रोजगार बढेगा एवं किसान संबल होगा ! साथ ही देश पर आयात का दबाब भी कम
होगा !
सामाजिक दृष्टी से भी याक काफी उपयुक्त है
! यथा आप काफी कम खर्चे में किसी अवसर पर सामूहिक भोज का भी आयोजन काफी कम संसाधन
के साथ कर सकते है ! साथ ही यह एक “रेडी टू इट” व्यंजन है , जिस कारण आप इसे “जस्ट
इन टाइम “ इन्वेंटरी से भी मैनेज कर सकते है ! यहाँ तक की इस प्रकार के व्यंजन के उपयोग
होने पर “फ़ूड वेस्ट “ की भी न के बराबर संभावना रहती है !
यह एक न्यूतम समय में तैयार होने वाला
भोजन है , जो की पॉपुलर फ़ास्ट फ़ूड “मैगी“ से भी कम समय में परोसा जा सकता है !
खान – पान का लोगो के व्यवहार पर भी असर
पड़ता है ! कहा भी गया है , जथा आहार – यथा
व्यवहार ! सामान्यतः देखा गया है की इस प्रकार के भोजन करने वाले लोग शांत चित्त
के और फुर्तीले होते है !
निश्चित रूप से कहा जा सकता है की चूड़ा (पोहा), दही और गुड़
एक सर्वगुणसंपन्न भोजन का व्यंजन है ! साथ ही इस तरह के और भी कई सारे भारतीय
व्यंजन अलग-अलग क्षेत्रो में पाए जाते है
, जिसके अपने आप में कई फायदे है !
हमें चाहिए की अपने – अपने अंचलो के इस
प्रकार के गुणकारी लोक आहार और व्यवहार को बचाए एवं उसका संवर्धन करे !

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